पूर्व प्रधानमंत्री अजातशत्रु श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनके दूसरे पुण्यतिथि पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ।हो सकता है आप उन्हें एक प्रधानमंत्री के रूप में याद करेंगे या फिर भाजपा नेता के रूप में लेकिन मैं उन्हें एक राष्ट्रनेता के तौर पर याद करूँगा , एक ऐसा नेता जिसने राजनीतिक लाभ के लिए अनैतिक कार्य नही किया, सत्ता के लिए खरीद फरौक्त नही किया विपक्ष में बैठना स्वीकार किया लेकिन जनता के फैसला को सर आंखों स्वीकार किया। पहली बार 1957 मे बलरामपुर लोकसभा से चुनाव जीतकर संसद पहुँचे।उन्होंने पंडित नेहरू संसद में उनके मुख्य के सामने कहा था कि "आपका नीति विभाजनकारी है आपके चरित्र में चर्चिल और चम्बरलीन दोनों दिखता है" नेहरू जी तम-तामा उठे । हालांकि उस वक्त राजनीतिक विरोध संसद के अंडर ही रहता था । एक बार जब नेहरू जी अटल जी से एक पार्टी में मिले थे उनके साथ कुछ विदेशी मेहमान भी था उन्होंने उनका परिचय अटल जी से करवाते हुए कहा था कि ये लड़का भारत का भविष्य है।आजके समय मे ऐशा देखने को कहा मिलता है, " ना वो देवी है ना वो कराह है" समय के साथ सबकुछ बदल जाता है। लगभग 40 वर्ष विपक्ष में बैठने के बाद 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने , फिर 13 महीना और 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। एक प्रधानमंत्री के रूप में देश के आर्थिक इस्थिति को मजबूत किया देश का जीडीपी 9 तक पहुचाया । स्वर्णिमचतुर्भुज योजना के तहत देश के 4 महानगर को सड़क से जोड़ने का नीव रखा।शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया। रक्षा विभाग को मजबूत किया। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को करारा जबाब देने के साथ अमरीकी वर्चस्व को भी जबाब दिया , जब अमेरिका भारत को धमकी दे रहा था कि "पाकिस्तान बोल रहा है कि वो भारत पर परमाणु बम गिराएगा तब अटल जी ने अमेरिका को कहा था कि मैं भारत का कुछ हिस्सा खत्म मान चुका हूं कल सुबह तक विश्व के नक्से पर पाकिस्तान नामोनिशान तक नही होगा"
पूरा जीवन उच्च आदर्श नैतिकता का पालन किया, "सदा जीवन उच्च विचार" फिट बैठता है उन पर । देश आपको एक प्रधानमंत्री और कवि के रूप में याद करेगा लेकिन मैं आपको एक श्रेष्ठ इंसान के तौर पर याद करूँगा। एक ऐसा इंसान जिसमे जीवन भर अनुशासन, राष्ट्रधर्म का पालन किया। राजनीतिक में रहकर स्वयं को दागी नही होने दिया जैसे कमल कीचड़ में रहकर स्वयं को कीचड़ जैसा नही होना दिया।
शत शत नमन
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