पूर्व प्रधानमंत्री अजातशत्रु श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनके दूसरे पुण्यतिथि पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ।हो सकता है आप उन्हें एक प्रधानमंत्री के रूप में याद करेंगे या फिर भाजपा नेता के रूप में लेकिन मैं उन्हें एक राष्ट्रनेता के तौर पर याद करूँगा , एक ऐसा नेता जिसने राजनीतिक लाभ के लिए अनैतिक कार्य नही किया, सत्ता के लिए खरीद फरौक्त नही किया विपक्ष में बैठना स्वीकार किया लेकिन जनता के फैसला को सर आंखों स्वीकार किया। पहली बार 1957 मे बलरामपुर लोकसभा से चुनाव जीतकर संसद पहुँचे।उन्होंने पंडित नेहरू संसद में उनके मुख्य के सामने कहा था कि "आपका नीति विभाजनकारी है आपके चरित्र में चर्चिल और चम्बरलीन दोनों दिखता है" नेहरू जी तम-तामा उठे । हालांकि उस वक्त राजनीतिक विरोध संसद के अंडर ही रहता था । एक बार जब नेहरू जी अटल जी से एक पार्टी में मिले थे उनके साथ कुछ विदेशी मेहमान भी था उन्होंने उनका परिचय अटल जी से करवाते हुए कहा था कि ये लड़का भारत का भविष्य है।आजके समय मे ऐशा देखने को कहा मिलता है, " ना वो देवी है ना वो कराह है" समय के साथ सबकुछ बदल जाता है। लगभग 40 वर्ष विपक्ष म...