🇮🇳शिक्षा का उद्देश्य 🇮🇳
आज आप किसी से पूछो की आपका जीवन का उद्देश्य क्या है? आप पढ़कर क्या बनना चाहते हैं?
अधिकांशत युवा का एक ही उत्तर होगा कि वो 'पढ़लिखकर' सरकारी नौकरी करना चाहता है। कोई आईएएस, कोई आईपीएस , कोई इंजीनियर ,कोई डॉक्टर, कोई आयकर पदाधिकारी आदि बनना चाहता है।वो समाज में सम्मान पाना चाहता है, उसे पैसा कमाना है।
मैं (आशुतोष झा) जब भारतीय इतिहास को पढ़ता हूं, अंग्रेजी सडयंत्र को पढ़ता हूं मेरी आँखें धोखा खा जाती है। गुलाम भारत मे अंग्रेज़ चाहते थे कि भारत के लोग थोड़ा-बहुत पढ़ लिख ले ताकि वो अंग्रेजी सरकार की गुलामी कर सके । वहाँ से ये विचार का जन्म हुआ कि पढ़लिखकर सरकारी नौकरी करनी है। और दुर्भाग्य से ये आज भी जारी है। अंग्रेज़ चले गए लेकिन अंग्रेजी सोच नही गयी।
मैं ये नही कहता कि सरकारी नौकरी करनी बुरी बात है लेकिन मैं ये जरूर कहूंगा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सरकारी नौकरी नही होनी चाहिए।
निःस्वार्थ भाऊ से जन सेवा करना था। आपको एक बात पता होगा कि भारतीय के बारे यह कहा जाता है की यहाँ " हर घर मे एक वैद(डॉक्टर) मिल जायेगा"। आप इस वाक्य पर आत्मचिंतन कीजिए आप बहुत कुछ सोच पाएंगे।
भारतीय गुरुकुल में सभी तरह के विद्या दिया जाता था। आजके तरह नही की sin ,cos को रटना पड़े। पहले वही पढ़ाई होता था जो आपको वास्तविक जीवन मे उपयोग हो सके।
आजके समय मे 'नैतिकता' का बात ही नही करना चाहिए क्योंकि नैतिकता जैसे शब्द केवल शब्दकोश में पड़े शब्द है। शिक्षित होने का सबसे बड़ा प्रमाण उच्च आदर्श का पालन करना और नातिक्तावन होना होना चाहिए। आपका डिग्री केवल एक पेपर है शिक्षा आपके आचरण में दिखना चाहिए ।
मैं आखिरी में यही कहूंगा कि हम आने वाले पीढ़ी को नैतिकता का ज्ञान भी देंगे, अधिकार से ज्यादा जरूरी है कर्तव्य पालन करने का ज्ञान ।
🇮🇳जय हिंद, जय भारत, जय शिक्षा।🇮🇳
✍️ आशुतोष झा
Right we are follow this statement and try to continue future time
ReplyDeleteThanks you!
Delete